अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को दावा किया कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर लंबे समय तक व्यापक अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण स्वीकार करने पर सहमति जताई है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता हुई, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और परमाणु मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाना था।
IAEA निरीक्षकों को लेकर तेहरान का इनकार
ट्रंप की टिप्पणी ईरान द्वारा अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दावे को खारिज किए जाने के बाद आई है। वेंस ने कहा था कि तेहरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को दोबारा देश में प्रवेश की अनुमति देने पर सहमत हो गया है।
ईरान ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के साथ उसका सहयोग मौजूदा प्रक्रियाओं के तहत जारी रहेगा और किसी नए समझौते पर सहमति नहीं बनी है।
यह भी पढ़ें – दिल्ली कैपिटल्स में होगी ऋषभ पंत की वापसी, कुलदीप यादव तय करेंगे लखनऊ का रास्ता
निरीक्षण व्यवस्था वार्ता का प्रमुख मुद्दा
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर कहा कि व्यापक निरीक्षण व्यवस्था भविष्य की वार्ताओं के लिए आवश्यक है और इससे परमाणु कार्यक्रम में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से कहता रहा है कि किसी भी संभावित समझौते में सत्यापन और निगरानी व्यवस्था प्रमुख तत्व होंगे।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर भी टिप्पणी
ट्रंप ने संकेत दिया कि कथित निरीक्षण समझौता अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक समझ का हिस्सा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि तेहरान द्वारा किए गए कथित रियायतों को देखते हुए अमेरिका फिलहाल हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी नौसैनिक नाकेबंदी की योजना नहीं बना रहा है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक उपस्थिति बनी रहेगी।
प्रतिबंधों में राहत और मानवीय सहायता
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि किसी प्रकार की आर्थिक राहत या धनराशि जारी की जाती है, तो उसे अमेरिकी निगरानी वाले एस्क्रो तंत्र के तहत रखा जाएगा।
उनके अनुसार, इन संसाधनों का उपयोग केवल खाद्य सामग्री, कृषि उत्पादों और चिकित्सा आपूर्ति जैसी मानवीय जरूरतों के लिए किया जाएगा।
यह भी पढ़ें – भारतीय शेयर मार्केट में दर्ज हुई भारी गिरावट, निवेशकों में दिखा बिकवाली का दौर
ईरान ने ऐसी किसी व्यवस्था की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है।
अंतिम समझौते पर अभी भी अनिश्चितता
दोनों देशों के बीच संपर्क जारी रहने के बावजूद निरीक्षण व्यवस्था, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु प्रतिबद्धताओं को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि वाशिंगटन और तेहरान के परस्पर विरोधी सार्वजनिक बयान किसी व्यापक समझौते तक पहुंचने की जटिलताओं को दर्शाते हैं।