अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने मंदिर प्रशासन में व्यापक सुधारों की सिफारिश की है।
तीन सदस्यीय एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश गृह विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट में प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी को मजबूत करने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं।
लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने यह रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी।
ट्रस्ट संरचना में बदलाव का सुझाव
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली में व्यापक पुनर्गठन की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में प्रमुख धार्मिक संस्थानों की तर्ज पर एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का सुझाव दिया गया है, ताकि संचालन, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की बेहतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
इस कदम का उद्देश्य जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाना बताया गया है।
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दान संग्रह और वित्तीय प्रक्रियाओं की जांच
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद एसआईटी का गठन किया था।
जांच के दौरान टीम ने दान संग्रह प्रक्रिया, नकदी गणना प्रणाली और वित्तीय अभिलेखों की समीक्षा की। मंदिर प्रशासन और संबंधित व्यवस्थाओं से जुड़े लगभग 150 लोगों के बयान भी दर्ज किए गए।
अधिकारियों के अनुसार, जांच में दान पेटियों, बैंकिंग प्रक्रियाओं और मूल्यवान चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े पहलुओं का भी परीक्षण किया गया।
अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशासनिक सुधारों से संबंधित कई सुझाव शामिल हैं।
हालांकि, रिपोर्ट की पूरी सामग्री अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने कहा कि जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट अगले 10 से 15 दिनों में प्रस्तुत की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान रिपोर्ट प्रारंभिक निष्कर्षों पर आधारित है और इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
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आरोपों के बाद शुरू हुई जांच
यह जांच उन आरोपों के बाद शुरू की गई थी जिनमें दावा किया गया था कि मंदिर में प्राप्त नकद दान और अन्य मूल्यवान चढ़ावों के प्रबंधन में अनियमितताएं हो सकती हैं।
दान स्वरूप प्राप्त नकदी, सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के लेखा-जोखा को लेकर सवाल उठाए गए थे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी
मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जांच की प्रगति पर नियमित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। वहीं कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने आरोपों के बावजूद प्राथमिकी दर्ज न होने पर सवाल उठाए हैं।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है और अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।