केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को स्वीकार किया कि NEET (UG) 2026 परीक्षा के आयोजन में कुछ चूकें हुई थीं, जिसके बाद पेपर लीक के आरोपों के चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार ने समय रहते आवश्यक सुधार किए और पुनर्परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की।
प्रधान ने कहा कि सरकार ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधारात्मक कदम उठाए और छात्रों का विश्वास बहाल करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा, “हम स्वीकार करते हैं कि हमारी ओर से कुछ चूकें हुई थीं और हमने उन्हें सुधारा।”
छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि किसी भी परिस्थिति में छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बनाए रखने की अपील की और कहा कि सरकार ने व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं।
प्रधान ने कहा कि परीक्षा के सफल आयोजन में राज्यों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और तथाकथित “पेपर माफिया” के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगी।
उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
विपक्ष की आलोचना का जवाब
पुनर्परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों के उपयोग को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर भी मंत्री ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और राज्य पुलिस की सहायता केवल परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से ली गई थी।
प्रधान ने विपक्षी दलों से छात्रों से जुड़े मुद्दों पर राजनीति से बचने की अपील की।
पुनर्परीक्षा में कड़े सुरक्षा इंतजाम
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार, NEET (UG) 2026 की पुनर्परीक्षा देशभर में व्यापक सुरक्षा प्रबंधों के बीच आयोजित की गई।
एजेंसी ने बताया कि भारत के 5,440 परीक्षा केंद्रों और विदेशों के 14 केंद्रों पर 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
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यह परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी सहित 13 भाषाओं में आयोजित की गई।
एनटीए के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर आधार-आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन, सीसीटीवी निगरानी, सिग्नल जैमर और दो-स्तरीय तलाशी व्यवस्था लागू की गई।
परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने पर जोर
सरकार का कहना है कि पुनर्परीक्षा का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को पुनर्स्थापित करना था।
अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में भी परीक्षा सुरक्षा को मजबूत बनाने और अनियमितताओं को रोकने के लिए संस्थागत सुधारों तथा निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ किया जाएगा।