मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक प्रौद्योगिकी शेयरों में कमजोरी, आईटी कंपनियों में गिरावट और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे।
बीएसई सेंसेक्स 506.38 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 76,587.69 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 सूचकांक 162 अंक या 0.67 प्रतिशत फिसलकर 23,940.90 पर बंद हुआ और 24,000 के स्तर से नीचे आ गया।
वैश्विक टेक शेयरों में बिकवाली का असर
दुनियाभर के प्रौद्योगिकी शेयरों में मुनाफावसूली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तेजी के बाद इस वर्ष शानदार प्रदर्शन करने वाले टेक शेयरों में कई प्रमुख बाजारों में बिकवाली देखी गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक भी दबाव में रहा, जबकि अमेरिकी वायदा बाजारों में भी कमजोरी दर्ज की गई।
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आईटी शेयरों ने बढ़ाया दबाव
घरेलू बाजार में आईटी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा।
इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो और एचसीएलटेक जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी आईटी सूचकांक में भी उल्लेखनीय कमजोरी रही।
बड़े आईटी शेयरों में इन्फोसिस सबसे अधिक दबाव में रहा, जबकि टीसीएस और विप्रो के शेयरों में भी गिरावट देखी गई।
ईरान-अमेरिका समझौते को लेकर अनिश्चितता
निवेशकों की चिंता बढ़ाने वाले अन्य कारकों में ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक घटनाक्रम भी शामिल रहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी कि यदि ईरान अंतरिम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता, तो अमेरिका आगे की कार्रवाई कर सकता है।
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इस बयान के बाद निवेशकों ने संभावित भू-राजनीतिक जोखिमों और उनके वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा बाजारों पर प्रभाव को लेकर सतर्क रुख अपनाया।
वैश्विक संकेतों पर नजर
विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक टेक शेयरों में गिरावट, घरेलू आईटी कंपनियों में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के संयुक्त प्रभाव से भारतीय बाजारों में दबाव देखने को मिला।
बाजार सहभागियों की नजर अब वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रदर्शन, ईरान-अमेरिका वार्ताओं और अन्य अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी।
मेरा विचार
मंगलवार को भारतीय शेयर मार्केट में दर्ज हुई भारी गिरावट का सबसे मुख्य कारण ईरान और युएस के बीच शांति समझौते में हो रही देरी या यूँ कहें कि इजराइल द्वारा इस शांति समझौते से ख़ुद को अलग रखना दुनिया भर के बाजारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।ऐसे में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का एक बार फिर बंद होना निश्चित तौर पर वैश्विक संकट बन गया है। ऐसे में अगर इन देशों के बीच इस शांति समझौते पर बात नहीं बनती तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है और इसका सीधा असर भारतीय बाज़ार के साथ दुनिया भर में दिखेगा।