बांग्लादेश की बर्खास्त प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्राइब्यूनल (ICT) ने 2024 के छात्र आंदोलन पर हुई हिंसक कार्रवाई में उनकी भूमिका के लिए मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई है।
ट्राइब्यूनल का फैसला और मुख्य निष्कर्ष
तीन सदस्यीय पीठ ने लगभग 40 मिनट तक फैसला सुनाते हुए कहा कि हसीना ने प्रधानमंत्री रहते हुए छात्रों के खिलाफ बर्बर कार्रवाई के आदेश दिए या उसे रोकने में विफल रहीं। अदालत ने उन्हें भड़काऊ भाषण देने, घातक हथियारों के उपयोग का आदेश देने और हिंसा रोकने में असफल रहने पर दोषी ठहराया।
ट्राइब्यूनल ने पाया कि उन्होंने ड्रोन, हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों का इस्तेमाल कर निहत्थे छात्रों को निशाना बनाने का आदेश दिया था।
हसीना ने इस फैसले को “धांधली वाले ट्राइब्यूनल” और “अवैध सरकार” का परिणाम बताया है।
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सह-आरोपी कौन हैं?
ICT ने दो अन्य पूर्व अधिकारियों को भी दोषी ठहराया:
- असदुज्जामान खान कमाल, पूर्व गृह मंत्री (फरार, मृत्युदंड)
- चौधरी अब्दुल्लाह अल-ममून, पूर्व पुलिस प्रमुख (हिरासत में, दोषी स्वीकार किया)
ममून राज्य गवाह बन गए और उन्हें केवल पांच वर्ष कारावास की सजा दी गई।
उन पर लगे आरोप
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि हसीना और सह-आरोपियों ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान “समन्वित, व्यापक और व्यवस्थित हमले” की योजना बनाई। आरोपों में शामिल हैं:
- हिंसा के लिए उकसाना
- प्रदर्शनकारियों को मारने के आदेश
- अत्याचार रोकने में विफलता
- ड्रोन, हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों का उपयोग
- कई स्थानों पर छात्रों की हत्या
धनखरपुल और अशुलिया में 5 अगस्त 2024 को हुई हत्याओं के लिए हसीना को दो मामलों में मृत्युदंड दिया गया। उन्हें भड़काऊ भाषण और घातक कार्रवाई का आदेश देने पर आजीवन कारावास भी मिला।
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मौतों का आंकड़ा और अतिरिक्त आदेश
अभियोजन पक्ष के अनुसार, कार्रवाई में 1,400 तक लोगों की मौत हुई।
ICT ने शेख हसीना और असदुज्जामान कमाल की सभी संपत्तियों को राज्य के पक्ष में जब्त करने का आदेश भी दिया।