भारतीय-अमेरिकी वकील नील कट्याल बुधवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक मामले की पैरवी करेंगे, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आपातकालीन शक्तियों के तहत टैरिफ लगाने के अधिकार को चुनौती दी गई है। ट्रंप ने इस मामले को “देश के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक” बताया है।
मामले का केंद्र: राष्ट्रपति का संवैधानिक अधिकार या संसद की शक्ति?
यह मामला इस प्रश्न पर केंद्रित है कि क्या 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार है, या यह शक्ति केवल कांग्रेस के पास निहित है।
कट्याल का तर्क है कि कराधान और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को प्राप्त है। इससे पहले फेडरल सर्किट की अपीलीय अदालत ने 7-4 के बहुमत से फैसला दिया था कि राष्ट्रपति ने IEEPA के तहत अपने अधिकारों का उल्लंघन किया। अब कट्याल इसी फैसले को बरकरार रखने की मांग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण सुनवाई के लिए 80 मिनट का समय निर्धारित किया है, जो सामान्य 60 मिनट से अधिक है। यह सुनवाई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित कर रही है।
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ट्रंप ने कहा – “देश के भविष्य का सवाल”
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा:
“अगर हम जीत गए, तो हम दुनिया का सबसे सुरक्षित और संपन्न देश बन जाएंगे। अगर हार गए, तो हमारा देश तीसरी दुनिया के देशों जैसा हो सकता है।”
ट्रंप ने शुरुआत में सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में यह कहते हुए पीछे हट गए कि उनकी उपस्थिति सुनवाई से ध्यान भटका सकती है।
कौन हैं नील कट्याल?
नील कट्याल अमेरिकी न्याय जगत के एक प्रसिद्ध वकील हैं, जिन्होंने अब तक 50 से अधिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट में बहस की है। वे 2000 में बुश बनाम गोर मामले में उप-राष्ट्रपति एल गोर के सह-वकील के रूप में चर्चा में आए थे।
ट्रंप की कई नीतियों का विरोध करने के कारण उन्हें “ट्रंप के विरोधी वकील” के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने मुस्लिम-बहुल देशों पर यात्रा प्रतिबंध और तेज़ निर्वासन नीति जैसी पहलों का विरोध किया था।
कट्याल का जन्म शिकागो में भारतीय मूल के माता-पिता के घर हुआ — उनकी मां डॉक्टर और पिता इंजीनियर थे। उन्होंने येल लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की, जहाँ वे प्रसिद्ध संवैधानिक विशेषज्ञ अखिल अमर के छात्र रहे। उनकी बहन सोनिया कट्याल कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में प्रोफेसर हैं।
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अन्य भारतीय-अमेरिकी भी केस का हिस्सा
एक अन्य भारतीय-अमेरिकी वकील प्रतीक शाह, जो एकिन गम्प की सुप्रीम कोर्ट और अपीलीय प्रैक्टिस के प्रमुख हैं, भी इस मामले में शामिल हैं। उन्होंने लर्निंग रिसोर्सेज और हैंड2माइंड जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व किया है, जिन्होंने राष्ट्रपति की शक्तियों को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ जोड़कर एक ही सुनवाई में शामिल किया है। SCOTUSblog के अनुसार, कट्याल को मुख्य दलीलें पेश करने के लिए कॉइन टॉस (सिक्का उछाल) के बाद चुना गया।