पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अवामी एक्शन कमेटी (AAC) के नेतृत्व में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। तीन दिनों से जारी इन प्रदर्शनों में कम से कम 10 नागरिकों की मौत हो चुकी है और 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जब प्रदर्शनकारियों की झड़प पाकिस्तानी सुरक्षा बलों से हुई।
आर्थिक तंगी और राजनीतिक असंतोष से भड़का जनाक्रोश
बिजली और आटे की बढ़ती कीमतों, लगातार बिजली कटौती, और इस्लामाबाद की उपेक्षा से जनता में गहरा रोष है।
बाग जिले के धिरकोट में ही चार प्रदर्शनकारियों की गोली लगने से मौत हुई, जबकि मुजफ्फराबाद, डडयाल (मीरपुर) और चमयाटी (कोहाला के पास) से भी मौतों की खबरें आई हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह आंदोलन क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को उजागर करता है, जहां संसाधनों की भरमार होने के बावजूद विकास की कमी और शासन की नाकामी साफ दिखती है।
क्या है अवामी एक्शन कमेटी (AAC)?
आईएएनएस के अनुसार, यूरोपियन टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि AAC नागरिक संगठनों का एक गठबंधन है, जिसने आटे और बिजली के दामों में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है।
AAC की मुख्य मांगों में से एक है — पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को खत्म करना, ताकि स्थानीय जनता को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मंगल डैम जैसे संसाधन संपन्न क्षेत्र में होने के बावजूद, स्थानीय लोग महंगी बिजली, अनियमित आपूर्ति, और आवश्यक वस्तुओं के ऊंचे दामों से जूझ रहे हैं।
जनजीवन ठप, संचार सेवाएं बाधित
लगातार विरोध प्रदर्शनों के कारण बाजार, स्कूल और सार्वजनिक परिवहन बंद कर दिए गए हैं।
प्रशासन ने कई इलाकों में आंशिक इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
- पाकिस्तान के 13वें संविधान संशोधन (2018) के तहत जोड़ी गई 12 आरक्षित विधानसभा सीटों को खत्म करना।
- बिजली और आटे की कीमतों में कमी, तथा स्थानीय लोगों के लिए उचित सब्सिडी प्रदान करना।
- राजनीतिक स्वायत्तता और संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग की मांग।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार ने शीघ्र हस्तक्षेप नहीं किया, तो पीओके का यह असंतोष एक बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है।