पाकिस्तान ने अपनी सशस्त्र सेनाओं से संबंधित कानूनों में बड़े पैमाने पर बदलाव करते हुए पाकिस्तान आर्मी एक्ट अमेंडमेंट्स 2025 तथा नौसेना और वायुसेना के समान विधेयक को मंजूरी दे दी है। ये संशोधन देश की सैन्य संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाते हैं।
चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का गठन
नए कानून के तहत सेना प्रमुख को चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) घोषित किया गया है, जो अब संयुक्त रूप से रणनीतिक और संचालन संबंधी सर्वोच्च सैन्य अधिकार रखेंगे।
सूत्रों के अनुसार, CDF का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा, जिससे वर्तमान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर नवंबर 2030 तक पद पर बने रह सकते हैं।
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उच्च सैन्य नियुक्तियों का अधिकार CDF के पास
संशोधन वरिष्ठ नियुक्तियों पर CDF की निर्णायक भूमिका स्थापित करते हैं:
- VCOAS और DCOAS की नियुक्ति अब केवल CDF की सिफारिश पर होगी।
- कानून में “सरकार” शब्द को हटाकर नियुक्ति अधिकार सीधे सेना प्रमुख को सौंप दिया गया है।
- चीफ ऑफ जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) का पद 27 नवंबर 2025 से समाप्त कर दिया जाएगा।
नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड पर भी नियंत्रण
CDF का प्रभाव पाकिस्तान की नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड (NSC) तक विस्तृत है:
- प्रधानमंत्री NSC कमांडर को CDF और सेना प्रमुख की सिफारिश पर तीन साल के लिए नियुक्त करेंगे।
- कमांडर को एक और तीन वर्षों के लिए पुनर्नियुक्त किया जा सकेगा।
- इन नियुक्तियों, पुनर्नियुक्तियों या विस्तार को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
- सेवा अवधि, सेवानिवृत्ति आयु और हटाने के प्रावधान NSC कमांडर पर लागू नहीं होंगे।
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CDF की शक्तियों पर सीमित सरकारी हस्तक्षेप
संघीय सरकार CDF की जिम्मेदारियाँ निर्धारित कर सकती है, परंतु कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि सरकार बहु-क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों में उसकी शक्तियों को सीमित नहीं कर सकती।
सैन्य नेतृत्व का केंद्रीकरण
इन सभी संशोधनों के परिणामस्वरूप पाकिस्तान में सैन्य नेतृत्व का अभूतपूर्व केंद्रीकरण होता है, जिसमें सर्वोच्च कमान और रणनीतिक निर्णय-निर्माण अब एक ही पद—CDF—के अधीन आ गए हैं।