अफगानिस्तान और पाकिस्तान ने तुर्की के इस्तांबुल में शांति वार्ता फिर से शुरू की है, ठीक एक दिन बाद जब पहले दौर की बातचीत विफल घोषित कर दी गई थी। यह जानकारी रॉयटर्स को चार सूत्रों ने दी।
बातचीत ऐसे समय में बहाल हुई है जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी थी कि अगर काबुल ने पाकिस्तान पर हमले करने वाले आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो पाकिस्तान “तालिबान शासन को मिटा देगा।”
तुर्की और क़तर बने मध्यस्थ
तीन सूत्रों के अनुसार, तुर्की और क़तर ने मध्यस्थता करते हुए वार्ता को पुनः शुरू कराया ताकि इस महीने हुई सीमा झड़पों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके, जिनमें दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है।
एक पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि इस्लामाबाद की मुख्य मांग वही है—अफगानिस्तान को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने होंगे।
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अफगान प्रतिनिधिमंडल से जुड़े एक सूत्र ने कहा, “पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच अधिकांश मुद्दे शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ गए हैं, लेकिन पाकिस्तान की कुछ मांगों पर सहमति बनाना कठिन है और समय लगेगा।”
काबुल का पलटवार
काबुल ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज किया है, यह कहते हुए कि उसका टीटीपी पर कोई नियंत्रण नहीं है। अफगान गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह अपनी आंतरिक सुरक्षा समस्याओं पर ध्यान दे और अफगानिस्तान के साथ तनाव न बढ़ाए।
“अगर किसी ने संघर्ष भड़काने की कोशिश की, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी,” हक्कानी ने चेतावनी दी, यह जोड़ते हुए कि अफगानिस्तान शांति चाहता है लेकिन हमले की स्थिति में अपनी रक्षा करेगा।
पाकिस्तान का कड़ा रुख
रक्षा मंत्री आसिफ के आक्रामक बयान इस्तांबुल में शांति वार्ता टूटने के तुरंत बाद आए। वहीं, सूचना मंत्री अत्ताउल्ला तारार ने काबुल पर “दोषारोपण” का आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है।
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हिंसा रोकने की कोशिशें
वार्ता का उद्देश्य 2021 के बाद से सबसे गंभीर सीमा हिंसा को रोकना है, जिसमें अब तक 70 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। झड़पें पाकिस्तान द्वारा टीटीपी नेताओं पर हवाई हमले करने के बाद भड़कीं।
हालांकि 19 अक्टूबर को दोहा में युद्धविराम समझौता हुआ था, लेकिन हिंसा जारी रही। गुरुवार को पाकिस्तान ने घोषणा की कि उसने टीटीपी के डिप्टी कमांडर और अमेरिका द्वारा नामित आतंकवादी क़ारी अमजद को मार गिराया है—जो इस्लामाबाद के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।