पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा बूथ लेवल एजेंट (BLA) की नियुक्ति से जुड़े नियमों में संशोधन किए जाने के बाद बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) आमने-सामने आ गई हैं।
चुनाव आयोग ने किए नियमों में बदलाव
चुनाव आयोग ने मंगलवार को जारी सर्कुलर में 9 अगस्त 2023 के अपने पुराने निर्देश के पैराग्राफ 3(iv) में संशोधन किया।
नए नियम के तहत, अब यदि किसी विशेष भाग या बूथ में उपयुक्त व्यक्ति उपलब्ध नहीं है, तो उसी विधानसभा क्षेत्र के किसी भी पंजीकृत मतदाता को बूथ लेवल एजेंट (BLA) बनाया जा सकता है।
आयोग ने कहा कि यह संशोधन उन क्षेत्रों में प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए किया गया है जहां राजनीतिक दलों को योग्य एजेंटों की नियुक्ति में कठिनाई होती है।
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टीएमसी ने लगाया पक्षपात का आरोप
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस बदलाव को “चालाकी भरा कदम” बताते हुए बीजेपी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।
टीएमसी ने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा,
“चुनाव आयोग ने चुपचाप और चालाकी से बूथ लेवल एजेंट्स की नियुक्ति के नियमों में बदलाव किया है। यह गंभीर सवाल उठाता है। जब बीएलए को उसी बूथ का होना चाहिए, तो बाहरी लोगों को अनुमति क्यों? क्योंकि बीजेपी को स्थानीय एजेंट नहीं मिल रहे हैं और वह बाहर से लोगों को लाकर प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहती है।”
टीएमसी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद कुणाल घोष ने भी इस निर्णय की आलोचना की और कहा कि यह कदम “भ्रम और जटिलता” पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि अगर यह परिपत्र सही है, तो “इसका विरोध होना चाहिए।”
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बीजेपी ने बताया ‘सकारात्मक और व्यावहारिक कदम’
वहीं, बीजेपी ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत किया और इसे सकारात्मक व व्यावहारिक कदम बताया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह संशोधन “बीएलए की नियुक्ति में लचीलापन लाता है” और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान में मदद करेगा।
उन्होंने कहा,
“यह कदम हमारे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करेगा। राजनीतिक दलों को सटीक मतदाता सूची तैयार करने में अधिक प्रभावी योगदान देने में सक्षम बनाएगा। चुनाव आयोग को धन्यवाद, जिसने जमीनी हकीकतों को समझते हुए यह फैसला लिया है।”
चुनाव आयोग ने इस विवाद पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उसका कहना है कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया गया है।