तमिलनाडु में सियासी पारा अभी से चढ़ता हुआ दिख रहा है। 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा अपनी कमर कसती हुई दिखाई दे रही है। दरअसल, भाजपा ने अपने अनुभवी नेताओं को मैदान में उतार दिया है। बीजेपी ने अपने नेशनल वाईस प्रेसिडेंट बैजयंत पांडा और केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल को अगले साल होने वाले चुनावों के लिए इंचार्ज और को-इंचार्ज की जिम्मेदारी सौंपी है।
अनुभवी नेताओं को मैदान में उतारने से होगा फायदा?
तमिलनाडु में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बैजयंत पांडा को मैदान में उतारना भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके पीछे का कारण है उनका संगठन में काम करने का अनुभव और हाल ही में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों में उनकी अहम भूमिका। वहीं बात करें केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल की तो वह नागरिक उड्डयन और सहकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में मोहोल ने अपना लोहा मनवाने का काम किया है। पुणे के मेयर रह चुके मोहोल ने 2024 में अपना पहला लोकसभा चुनाव जीता था जिसके बाद उन्हें दो मंत्रालयों में बतौर राज्य मंत्री काम करने का मौका मिला।
बैजयंत पांडा और मुरलीधर मोहोल हाल ही में चेन्नई पहुंचे जहां उन्होंने राज्य के बड़े नेताओं से मिलना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन और के. अन्नामलाई से मुलाकात की। इसके अलावा दोनों नेताओं ने पार्टी के अन्य नेताओं जैसे तमिलिसाई सौन्दराजन, वनथी श्रीनिवासन, एच राजा और डॉ एल मुरुगन से मुलाकात की।
सूत्रों की मानें तो भाजपा तमिलनाडु के लिए अपनी रणनीति तैयार करने में जुटी है जिसके लिए वह राज्य में अन्य विकल्प भी तलाश रही है। भाजपा राज्यों में उन विकल्पों की तलाश में जिससे वह सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठा सकती है। आपको बता दें कि बीजेपी पहले ही AIADMK के साथ आने वाले विधासभा चुनाव के लिए गठबंधन बना चुकी है।
भाजपा के सामने कई चुनौतियां
भाजपा के लिए तमिलनाडु की सत्ता हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा। इसमें भाजपा के सामने एक और बड़ी चुनौती होगी और वो है एक्टर विजय थलापति की पार्टी TVK क्योंकि भाजपा के अंदरूनी असेसमेंट के मुताबिक TVK पहले ही 20% वोट शेयर पर खड़ी है। ऐसे में NDA के लिए तमिलनाडु की चुनौती से निपटना बिल्कुल आसान नहीं होगा।
इसके अलावा बीजेपी के सामने AIADMK में चल रही अअंदरूनी कलह से पार पाने की भी चुनौती है। हालांकि पार्टी का मानना है कि इससे पार्टी की रणनीति प्रभावित नहीं होगी। कुल मिलाकर भाजपा के लिए तमिलनाडु की चुनौती काफी बड़ी साबित होने वाली है।