समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था।
‘ChatGPT पर देखिए क्यों हुआ था बैन’
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश ने कहा,
“ChatGPT पर जाकर देख लीजिए कि सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध क्यों लगाया था। हिंदू महासभा और आरएसएस दोनों पर महात्मा गांधी की हत्या में कथित भूमिका के चलते बैन लगाया गया था।”
ऐतिहासिक रूप से, 4 फरवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद भारत सरकार ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। तत्कालीन गृहमंत्री सरदार पटेल ने यह कदम संगठन की कथित सांप्रदायिक गतिविधियों और “हिंसा के कल्ट” के चलते उठाया था।
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सरदार पटेल का रुख और प्रतिबंध हटने की प्रक्रिया
पटेल ने अपने पत्राचार में लिखा था कि आरएसएस की गतिविधियां “राज्य और सरकार के अस्तित्व के लिए खतरा” हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि संगठन का गांधीजी की हत्या से सीधा संबंध सिद्ध नहीं हुआ।
सरकार ने आरएसएस से एक लिखित संविधान अपनाने, राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय संविधान को मान्यता देने की शर्त रखी। संगठन ने इन शर्तों को स्वीकार करने के बाद 11 जुलाई 1949 को प्रतिबंध हटा लिया गया।
कांग्रेस और सपा की नई मांग
अखिलेश यादव ने घोषणा की कि सत्ता में आने पर उनकी पार्टी सरदार पटेल के नाम पर एक विश्वविद्यालय स्थापित करेगी।
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा,
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“मेरी व्यक्तिगत राय है कि आरएसएस पर दोबारा प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। सरदार पटेल ने सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस और जमात-ए-इस्लामी की गतिविधियों से दूर रहने का आदेश दिया था, जिसे मोदी सरकार ने 2024 में हटा दिया। इसे फिर लागू किया जाना चाहिए।”