विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधी बातचीत अभी भी अधर में है, और कुछ अमेरिकी टैरिफ भारत के प्रति अनुचित (Unfair) हैं।
कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (Kautilya Economic Forum) में एक पैनल चर्चा के दौरान जयशंकर ने कहा:
“आज हमारे अमेरिका से कुछ मुद्दे हैं… हम अभी तक व्यापारिक चर्चाओं में किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। इसके अलावा, कुछ टैरिफ हम पर लगाए गए हैं, जिन्हें हमने सार्वजनिक रूप से अनुचित बताया है।”
रूस से ऊर्जा आयात पर लगे टैरिफ पर बोले जयशंकर
जयशंकर ने उन द्वितीयक अमेरिकी टैरिफों (Secondary Tariffs) पर भी बात की, जो रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा गंभीर है, लेकिन इसे समग्र संबंधों पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
“रूस से ऊर्जा आयात करने पर हम पर दूसरा टैरिफ लगाया गया है। जबकि अन्य देश — जिनके रूस से हमारे मुकाबले कहीं ज्यादा खराब रिश्ते हैं — वही काम कर रहे हैं। मैं इन मुद्दों को कम नहीं आंक रहा, लेकिन हमें इन्हें इतना बड़ा नहीं बनाना चाहिए कि यह हमारे हर संबंध को प्रभावित करे,” उन्होंने कहा।
जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संतुलन, बाजार पहुंच और टैरिफ सुधारों को लेकर बातचीत जारी है।
अमेरिका-चीन संबंधों पर भी दी टिप्पणी
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन के बीच संबंध आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेंगे।
“स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि अमेरिका-चीन के रिश्ते कई मायनों में विश्व राजनीति को प्रभावित करने वाले हैं,” जयशंकर ने कहा।
जयशंकर के बयान भारत की उस संतुलित कूटनीतिक नीति को दर्शाते हैं, जिसमें वह अमेरिका और रूस दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए बदलते वैश्विक परिदृश्य और व्यापारिक दबावों का सामना कर रहा है।