प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि वैश्विक तनाव, व्यापारिक व्यवधानों और आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव के बीच भारत आज शांति, रणनीतिक स्वायत्तता और समावेशी विकास का प्रतीक बनकर उभरा है।
‘भारत एक विश्वसनीय और स्थिर शक्ति’
ग्लोबल मेरीटाइम सीईओ फोरम में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की समुद्री शक्ति और वैश्विक साझेदारियाँ देश को एक “स्थिरता प्रदान करने वाली शक्ति” के रूप में स्थापित कर रही हैं।
उन्होंने कहा, “जब वैश्विक समुद्र अशांत होते हैं, तब दुनिया एक स्थिर प्रकाशस्तंभ की तलाश करती है — भारत वह प्रकाशस्तंभ बन सकता है।”
भारत की वृद्धि में समुद्री क्षेत्र की अहम भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र तेज़ी से प्रगति कर रहा है और अब यह देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बन चुका है।
उन्होंने बताया कि पिछले दशक में भारत के बंदरगाहों और व्यापारिक अवसंरचना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बना है।
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मोदी ने कहा कि भारत के बंदरगाह अब विकासशील देशों में सबसे कुशल माने जाते हैं, और कुछ मामलों में विकसित देशों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
अगली पीढ़ी के सुधार और वैश्विक भागीदारी
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने समुद्री क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए अगली पीढ़ी के सुधार लागू किए हैं और औपनिवेशिक युग के पुराने कानूनों को आधुनिक कानूनों से बदल दिया है।
उन्होंने कहा, “हमने सौ साल पुराने नौवहन कानूनों को हटाकर आधुनिक और भविष्य उन्मुख कानून लागू किए हैं।”
उन्होंने बताया कि ग्लोबल मेरीटाइम सीईओ फोरम में 85 से अधिक देशों, 500 प्रदर्शकों और 350 अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने भाग लिया है, जिससे यह मंच वास्तव में वैश्विक बन गया है।
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मैरिटाइम अमृत काल विजन 2047
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का समुद्री विकास मैरिटाइम अमृत काल विजन 2047 के अनुरूप है, जिसके चार स्तंभ हैं — बंदरगाह आधारित विकास, जहाज निर्माण, सुगम लॉजिस्टिक्स और समुद्री कौशल विकास।
उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य भारत को विश्व की अग्रणी समुद्री शक्तियों में शामिल करना है।
इंडिया मेरीटाइम वीक 2025, जिसका विषय “यूनाइटिंग ओशन्स, वन मेरीटाइम विजन” है, 27 से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित की जा रही है, जिसमें टिकाऊ समुद्री विकास, हरित नौवहन और ब्लू इकॉनमी पर चर्चा की जा रही है।