सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण स्तरों पर गंभीर चिंता जताई और पंजाब व हरियाणा सरकारों से पराली जलाने पर नियंत्रण को लेकर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
कोर्ट ने कहा कि पराली जलाने की घटनाएं लगातार वायु गुणवत्ता को खराब कर रही हैं और इस पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
राज्यों से जवाब तलब
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 15 सितंबर से 10 नवंबर 2025 के बीच पंजाब और हरियाणा में 4,360 से अधिक पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं।
कोर्ट ने दोनों राज्यों से इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है और कहा कि स्थिति अब गंभीर रूप ले चुकी है।
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सीएक्यूएम की रिपोर्ट में गंभीर चिंता व्यक्त
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने अपने 46 पन्नों के हलफनामे में कहा कि पराली जलाना अब भी एक “गंभीर समस्या” बनी हुई है, जो हर साल दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता को बिगाड़ती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि यह एक मौसमी प्रवृत्ति बन गई है, जो लगातार प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रही है।
1,500 से अधिक प्रदूषणकारी इकाइयाँ बंद
सीएक्यूएम के अनुसार, पंजाब में 4,195 और हरियाणा में 363 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं।
स्थिति पर निगरानी के लिए आयोग ने 31 फ्लाइंग स्क्वॉड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की सहायता से, दोनों राज्यों में तैनात किए।
रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 1,556 प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों को बंद किया गया है।
सीएक्यूएम ने कहा कि उसने पराली जलाने की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई, तकनीकी समाधान और लक्षित हस्तक्षेपों को अपनाया गया है।
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अगली सुनवाई 17 नवंबर को
सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने बताया कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई है, इसलिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP-IV) लागू किया जाना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पंजाब और हरियाणा सरकारें पराली नियंत्रण की अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी, जब अदालत आगे के निर्देश जारी कर सकती है।