भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बुधवार को बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब कर नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता हसनत अब्दुल्ला द्वारा दिए गए भारत-विरोधी और भड़काऊ बयानों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई।
विदेश मंत्रालय ने इन टिप्पणियों को गैर-जिम्मेदाराना और शत्रुतापूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे बयान दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
ढाका की रैली में दिए गए विवादित बयान
हसनत अब्दुल्ला ने यह बयान सोमवार को ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार पर आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत विरोधी और अलगाववादी ताकतों को शरण दे सकता है और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों—अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा—यानी “सात बहनों” को भारत से अलग करने में मदद कर सकता है।
यह भी पढ़ें – ‘वोट चोरी’ बयान से INDIA गठबंधन को अलग करने पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला
उन्होंने कहा, “हम अलगाववादी और भारत-विरोधी ताकतों को शरण देंगे और फिर भारत की सात बहनों को अलग कर देंगे,” जिस पर सभा में मौजूद कुछ लोगों ने तालियां बजाईं।
संप्रभुता और बाहरी हस्तक्षेप का उल्लेख
अपने संबोधन में अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि यदि भारत उन ताकतों को शरण देता है जो बांग्लादेश की संप्रभुता, मतदान अधिकारों और मानवाधिकारों का सम्मान नहीं करतीं, तो बांग्लादेश जवाब देगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि आजादी के 54 साल बाद भी बांग्लादेश पर कुछ “गिद्धों” द्वारा नियंत्रण की कोशिशें जारी हैं, हालांकि उन्होंने भारत का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया।
यह भी पढ़ें – आतंकवाद के खिलाफ जॉर्डन के मजबूत रुख की पीएम मोदी ने सराहना की
राजनयिक संवेदनशीलता
विदेश मंत्रालय द्वारा उच्चायुक्त को तलब किया जाना इस बात को रेखांकित करता है कि भारत इन बयानों को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है, विशेष रूप से जब वे भारत की क्षेत्रीय अखंडता और कूटनीतिक सुरक्षा से जुड़े हों। अधिकारियों ने कहा कि भारत बांग्लादेश के राजनीतिक नेतृत्व से संयम और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा करता है।