भारत ने म्यांमार की मानवाधिकार स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे “एकतरफा और निराधार विश्लेषण” बताया है।
इस रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि थॉमस एच एंड्रयूज ने दावा किया था कि अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का असर भारत में रह रहे म्यांमार के विस्थापित लोगों पर पड़ा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तृतीय समिति में भारत की ओर से बयान देते हुए लोकसभा सांसद दिलीप सैकिया ने कहा कि यह दावा “पूरी तरह तथ्यहीन” है और “भारत के खिलाफ पक्षपाती” दृष्टिकोण दर्शाता है।
“भारत ऐसे पूर्वाग्रह और संकीर्ण विश्लेषण को अस्वीकार करता है,” उन्होंने कहा।
यह भी पढ़ें – पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश, राष्ट्रपति मुर्मू के साथ दिखीं राफेल पायलट शिवांगी सिंह
भारत ने आरोपों को बताया तथ्यहीन
सैकिया ने कहा कि पहलगाम हमले को म्यांमार के शरणार्थियों से जोड़ना “पूरी तरह तथ्यहीन” है।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ ने आरोप लगाया था कि भारत में हमले के बाद कुछ शरणार्थियों को हिरासत में लिया गया और उन्हें निर्वासन की धमकी दी गई, जबकि किसी म्यांमार नागरिक की इसमें कोई भूमिका नहीं थी।
सैकिया ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह “असत्यापित और झुकावपूर्ण मीडिया रिपोर्टों” पर भरोसा न करे जो भारत की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से प्रसारित की जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में 20 करोड़ से अधिक मुस्लिम नागरिक रहते हैं, जो वैश्विक मुस्लिम आबादी का लगभग 10 प्रतिशत हैं, और वे सभी सौहार्दपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
भारत ने दोहराया म्यांमार में शांति का समर्थन
असम के सांसद ने म्यांमार की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इससे नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियारों की स्मगलिंग और मानव तस्करी जैसी सीमापार चुनौतियाँ बढ़ रही हैं।
यह भी पढ़ें – PM Modi: वैश्विक अस्थिरता के बीच शांति और समावेशी विकास का प्रतीक बना भारत
उन्होंने दोहराया कि भारत का मानना है कि म्यांमार में स्थायी शांति समावेशी राजनीतिक संवाद और लोकतंत्र की शीघ्र बहाली से ही संभव है।
भारत एक “म्यांमार-नेतृत्व वाली और म्यांमार-स्वामित्व वाली” शांति प्रक्रिया का समर्थन करता है और ASEAN तथा संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों का भी सहयोग कर रहा है।
मानवीय सहायता अभियानों का उल्लेख
सैकिया ने भारत की मानवीय पहल का भी उल्लेख किया, जिसमें ऑपरेशन ब्रह्मा (मार्च 2025 के म्यांमार भूकंप के बाद शुरू), ऑपरेशन सहायता और ऑपरेशन सद्भाव जैसी राहत अभियानों का जिक्र शामिल था।