पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच एक बांग्लादेशी व्यक्ति ने स्वीकार किया कि उसने अपने ससुर का नाम दर्ज कर भारतीय वोटर ID बनवा लिया।
35 साल पहले आया था भारत
मोहम्मद खलील मोल्ला, जो 35 वर्ष पहले बांग्लादेश से भारत आया था, ने बताया:
“मैं भारतीय नहीं हूं। मैंने अपने पिता की जगह ससुर का नाम लिखकर वोटर कार्ड बनवाया।”
वह पहले टॉपसिया, फिर हावड़ा और अमता में रहने के बाद अब उलूबेरिया के श्रीरामपुर में बस गया है।
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दूसरा मामला भी सामने आया
स्थानीय लोगों ने एक अन्य व्यक्ति, शेख रेजाउल मंडल, पर भी पिता की जगह ससुर का नाम दर्ज कर वोटर कार्ड बनाने का आरोप लगाया है।
जब उसकी पत्नी से पूछा गया, तो उसने कहा:
“मुझे नहीं पता कि वोटर कार्ड में मेरे पिता और मेरे पति के पिता का नाम एक ही है या नहीं।”
यह मामला राजापुर थाने के अंतर्गत श्रीरामपुर इलाके में तनाव का कारण बना है।
SIR प्रक्रिया को लेकर बढ़ती चिंता
घटनाओं के सामने आने के बाद राज्य भर में मतदाताओं में चिंता बढ़ गई है। लोग आशंकित हैं कि उनके दस्तावेज रद्द हो सकते हैं या नाम मतदाता सूची से हट सकता है।
कई लोग यह भी जानना चाहते हैं कि क्या CAA आवेदन करने से उनका वोट का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
क्या है SIR (Special Intensive Revision)?
चुनाव आयोग ने 24 जून से विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू की है, जिसका उद्देश्य है:
- पात्र नागरिकों के नाम जोड़ना
- अपात्र लोगों के नाम हटाना
- 2002 की वोटर सूची या समकक्ष दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन
यह 2002 के बाद का सबसे बड़ा राज्य-स्तरीय SIR अभियान है।
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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दावा है कि मटुआ समुदाय के कई लोगों के नाम सूची से हट सकते हैं, जिससे उनके दस्तावेज और सुविधाएँ प्रभावित होंगी।
वहीं भाजपा ने लगभग 700 CAA हेल्प कैंप स्थापित किए हैं, यह आश्वासन देते हुए कि हिंदू शरणार्थियों के वोटर अधिकार सुरक्षित रहेंगे।