भारत में डिजिटल भुगतान को एक नया आयाम देते हुए, निवेशक अब म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स से सीधे यूपीआई (UPI) भुगतान कर सकेंगे। हाल ही में शुरू की गई यह सुविधा ‘पे विद म्यूचुअल फंड’ निवेशकों को उनके लिक्विड फंड्स से तुरंत राशि रिडीम कर भुगतान पूरा करने की अनुमति देती है।
यह सुविधा आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड और बजाज फिनसर्व एएमसी ने क्यूरी मनी के साथ साझेदारी में शुरू की है। इससे निवेशक अपने फंड्स का उपयोग रोजमर्रा के लेनदेन में कर सकेंगे, बिना बैंक खाते से पैसा ट्रांसफर किए। यह सुविधा म्यूचुअल फंड को बचत खाते जैसा विकल्प बनाती है, जो बेहतर रिटर्न और तुरंत भुगतान दोनों प्रदान करती है।
यह सुविधा कैसे काम करती है
लिक्विड फंड्स मुख्यतः कम अवधि के मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं और उच्च तरलता प्रदान करते हैं। पहले निवेशकों को फंड यूनिट्स रिडीम करके पैसा बैंक खाते में ट्रांसफर करना पड़ता था। अब यह प्रक्रिया स्वतः पूरी होती है — भुगतान सीधे फंड से यूपीआई के माध्यम से किया जा सकता है।
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म्यूचुअल फंड से भुगतान के फायदे
- तुरंत तरलता: बैंक खाते में ट्रांसफर किए बिना सीधे भुगतान की सुविधा।
- बेहतर रिटर्न: लिक्विड फंड्स पर लगभग 7% तक रिटर्न, जबकि बचत खातों पर केवल 2–4% ब्याज मिलता है।
- सुविधाजनक भुगतान: यूपीआई से सीधा जुड़ाव होने के कारण लेनदेन सरल और तेज़।
- लचीला कैश मैनेजमेंट: निवेशक और व्यवसाय अपने फंड्स को निवेशित रखकर भी आसानी से उपयोग कर सकते हैं।
सावधानियां और विचार करने योग्य बातें
- बाज़ार जोखिम: लिक्विड फंड्स कम जोखिम वाले होते हैं, लेकिन पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं।
- कराधान (Taxation): इन फंड्स से होने वाली आय निवेशक की आयकर दर के अनुसार टैक्सेबल होती है।
- आपातकालीन फंड: पूरी राशि म्यूचुअल फंड में रखने के बजाय कुछ धनराशि बैंक खाते में रखना बेहतर है।
- लेनदेन सीमाएं: कुछ मामलों में कट-ऑफ टाइम या राशि सीमा लागू हो सकती है।
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स्मार्ट फाइनेंशियल मैनेजमेंट की दिशा में कदम
‘पे विद म्यूचुअल फंड’ को भारत की वित्तीय क्रांति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह यूपीआई की सुविधा को म्यूचुअल फंड्स के रिटर्न से जोड़ता है। निवेशकों के लिए यह फीचर न केवल लिक्विडिटी बढ़ाता है, बल्कि बेहतर रिटर्न और आसान लेनदेन का नया अवसर भी प्रदान करता है।