भारत का इस्पात उद्योग तीव्र वृद्धि के चरण में प्रवेश कर रहा है। विश्व इस्पात संघ (World Steel Association) के अनुसार, 2025 और 2026 दोनों वर्षों में इस्पात की मांग लगभग 9% बढ़ेगी, जो विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ है। यह वृद्धि निर्माण, पूंजीगत वस्तुओं, ऑटोमोबाइल और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों के विस्तार से प्रेरित है।
बढ़ती खपत और उत्पादन गति
वित्त वर्ष 2023–24 में भारत की तैयार इस्पात खपत 136.29 मिलियन टन (MT) थी, जो 2024–25 में बढ़कर 150.23 MT हो गई। अप्रैल–जुलाई 2025 के बीच खपत 51.45 MT दर्ज की गई, जो मजबूत औद्योगिक और अवसंरचनात्मक मांग को दर्शाती है।
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नीतिगत सहयोग से विशेष इस्पात को बढ़ावा
केंद्र सरकार की विशेष इस्पात के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत 6,322 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसका लक्ष्य 25 मिलियन टन नई क्षमता और 40,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करना है। अब तक 27,106 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता मिल चुकी है, जबकि 17,000–25,200 करोड़ रुपये का निवेश दूसरी चरण में अपेक्षित है।
लेपित (Coated) और मूल्य-वर्धित इस्पात में तेजी
भारत का कोटेड इस्पात बाजार, 2024 में $27.7 बिलियन का था, जो 2030 तक $42 बिलियन तक पहुंचने की संभावना है, यानी 7.4% की वार्षिक वृद्धि दर। गोदाम, औद्योगिक छत और प्रीमियम निर्माण सामग्री में बढ़ती मांग इस क्षेत्र को गति दे रही है।
उद्योग जगत का विश्वास
अभय इस्पात के अध्यक्ष विनेश मेहता ने कहा, “भारत का इस्पात क्षेत्र एक परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर चुका है। हमारी प्राथमिकता नवाचार, गुणवत्ता और मूल्य-वर्धित उत्पादों पर केंद्रित है, जिससे हम राष्ट्रीय विकास की गति के साथ आगे बढ़ सकें।”
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औद्योगिक विकास में इस्पात की केंद्रीय भूमिका
सरकारी नीतियों के समर्थन, विशेष इस्पात प्रोत्साहन योजनाओं और अवसंरचना निवेश में वृद्धि के साथ, भारत का इस्पात उद्योग अगले दशक में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का प्रमुख स्तंभ बनने की दिशा में अग्रसर है।