वर्ष 2024-25 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 353.96 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। इसके साथ ही सरकार ने भंडारण अवसंरचना को मज़बूत करने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं, ताकि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके, आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ किया जा सके और किसानों को बेहतर दाम मिल सकें।
मौजूदा भंडारण क्षमता
सरकारी बयान के अनुसार, भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियों के पास वर्तमान में 917.83 लाख मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता (कवर और सीएपी) उपलब्ध है। इसके अलावा देशभर में 8,815 कोल्ड स्टोरेज हैं जिनकी क्षमता 40.21 मिलियन मीट्रिक टन है, ताकि नाशवंत वस्तुओं को सुरक्षित रखा जा सके।
विकेंद्रीकृत भंडारण भी बढ़ रहा है। अब तक 5,937 नई प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) पंजीकृत हो चुकी हैं और 73,492 का कंप्यूटरीकरण पूरा हो चुका है। PACS के कामकाज को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने ₹2,516 करोड़ की परियोजना को मंज़ूरी दी है।
क्यों ज़रूरी है मज़बूत भंडारण
आधुनिक गोदाम और कोल्ड स्टोरेज सिस्टम फसल नुकसान को कम करने, बफर स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। सरकार का कहना है कि पर्याप्त भंडारण क्षमता से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) जैसी योजनाओं का संचालन आसान होता है और उपभोक्ताओं को कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव से बचाया जा सकता है।
प्रमुख सरकारी योजनाएँ
भंडारण क्षमता को बढ़ाने में कई योजनाएँ अहम भूमिका निभा रही हैं:
- कृषि अवसंरचना कोष (AIF): 2020 में शुरू की गई इस योजना के तहत किसानों और निवेशकों को भंडारण व कटाई-के-बाद प्रबंधन परियोजनाओं के लिए सस्ती दरों पर ऋण दिया जाता है। सितंबर 2025 तक ₹73,155 करोड़ की मंज़ूरी 1.27 लाख परियोजनाओं को दी गई है, जिनमें हजारों गोदाम और कोल्ड स्टोरेज शामिल हैं।
- कृषि विपणन अवसंरचना (AMI): ग्रामीण क्षेत्रों में गोदाम और वेयरहाउस मज़बूत करने की योजना। जून 2025 तक 27 राज्यों में 49,796 परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं, जिनसे 982.94 लाख मीट्रिक टन की क्षमता जुड़ी है। इसके लिए ₹4,829.37 करोड़ की सब्सिडी दी गई।
- प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY): खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई योजना। जून 2025 तक 1,601 परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं, जिनमें से 1,133 पूरी/संचालित हैं। इनसे सालाना 255.66 लाख मीट्रिक टन की प्रसंस्करण क्षमता जुड़ी।
- दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना: मई 2023 में सहकारी क्षेत्र में शुरू की गई योजना के तहत PACS स्तर पर गोदाम, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्रसंस्करण इकाइयाँ और उचित मूल्य की दुकानें बनाई जा रही हैं।
किसानों को होगा सीधा फायदा
सरकार ने कहा कि बेहतर भंडारण और लॉजिस्टिक्स से किसानों को अपनी उपज बेहतर दामों पर बेचने का अवसर मिलेगा, बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और देशभर के बाज़ारों तक पहुँच आसान होगी।
“रिकॉर्ड उत्पादन और आधुनिक भंडारण सुविधाओं के साथ भारत आत्मनिर्भर भारत के विज़न की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है,” बयान में कहा गया।