दिवाली 2025 पर भारत में चांदी की रिकॉर्ड खरीद ने वैश्विक बाजारों में ऐतिहासिक संकट पैदा कर दिया है। ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, लंदन का सिल्वर मार्केट भारी दबाव में है और तरलता लगभग समाप्त हो गई है।
इस त्योहारी सीजन में निवेशक बड़ी मात्रा में चांदी के आभूषण, सिक्के और ETF खरीद रहे हैं। फाइनेंशियल इंफ्लुएंसर सार्थक आहुजा द्वारा चांदी-से-सोना 100:1 अनुपात को बढ़ावा देने के बाद मांग और बढ़ गई।
भारत की सबसे बड़ी कीमती धातु रिफाइनरी MMTC-PAMP पहली बार इतिहास में चांदी से खाली हो गई है। देश में प्रीमियम दर $5 प्रति औंस से ऊपर पहुंच गया है, जो सामान्य से कई गुना ज्यादा है।
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वैश्विक असर
ब्लूमबर्ग के अनुसार, चीन की छुट्टियों के कारण आपूर्ति बाधित होने, ETF में तेजी और अमेरिका को टैरिफ से पहले भेजी जा रही खेपों के चलते वैश्विक स्तर पर भी कमी बढ़ गई है।
लंदन सिल्वर मार्केट में लिक्विडिटी खत्म हो रही है और उधार दरें 200% वार्षिक तक पहुंच गई हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति तथाकथित ‘डिबेसमेंट ट्रेड’ का परिणाम है — यानी डॉलर की वैश्विक कमजोरी के चलते केंद्रीय बैंक और निवेशक सोना-चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश बढ़ा रहे हैं।
चांदी की कीमतें हाल ही में $54 प्रति औंस तक पहुंचीं, जो इतिहास में केवल दूसरी बार हुआ है। हालांकि, इसके बाद कीमतें 6–7% गिर गईं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सौर ऊर्जा उद्योग की बढ़ती मांग के कारण चांदी की मांग आपूर्ति से 678 मिलियन औंस अधिक हो गई है।
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म्यूचुअल फंड्स ने बंद की नई सिल्वर स्कीमें
भारत में कोटक एमएफ, यूटीआई और एसबीआई एमएफ ने सिल्वर फंड्स में नई सदस्यता अस्थायी रूप से रोक दी है।
कोटक म्यूचुअल फंड ने कहा, “भारत में भौतिक चांदी की तीव्र कमी के कारण घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय दरों की तुलना में काफी अधिक प्रीमियम पर हैं।”
सितंबर 2025 की शुरुआत में प्रीमियम 0.5% था, जो 9 अक्टूबर 2025 तक 5.7% तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों ने इसे 1980 के दशक के हंट ब्रदर्स संकट के बाद सबसे गंभीर सिल्वर स्क्वीज़ बताया है।