पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जुलाई में अपने अचानक त्यागपत्र के बाद शुक्रवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से भाषण दिया। वे भोपाल में आरएसएस संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य की पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए।
धनखड़ ने कहा, “चार महीने बाद, इस अवसर पर, इस पुस्तक पर, इस शहर में, मुझे बोलने में हिचक नहीं करनी चाहिए।”
RSS संबंधी कथाओं और CAA विरोध पर टिप्पणी
पुस्तक की चर्चा करते हुए धनखड़ ने कहा कि यह RSS को “अतिदक्षिणपंथी” और “अल्पसंख्यक-विरोधी” बताने वाले वर्षों पुराने कथनों को चुनौती देती है। उन्होंने कहा कि आलोचक संगठन को गांधी हत्या से जोड़ने की भी कोशिश करते रहे हैं, लेकिन “इन सबकी असंगतता अब पूरी तरह उजागर हो चुकी है।”
धनखड़ ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन को “अतार्किक” बताया।
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त्यागपत्र का संकेत: ‘कर्तव्य पहले, उड़ान बाद में’
भाषण के दौरान जब उनके सहयोगियों ने उन्हें उड़ान के समय की याद दिलाई, तो धनखड़ ने मंच से कहा, “मैं उड़ान पकड़ने की चिंता से अपने कर्तव्य को नहीं छोड़ सकता। और मित्रों, मेरा हालिया अतीत इसका प्रमाण है।”
धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था और तब से सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखी थी, सिवाय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण के।
वैश्विक अस्थिरता के बीच RSS को बताया ‘स्थिरकारी शक्ति’
धनखड़ ने कहा कि आरएसएस अपनी शताब्दी के निकट पहुंच रहा है और ऐसी परिस्थिति में वैद्य की पुस्तक का आना महत्वपूर्ण है। उन्होंने संगठन को “भारत की सबसे स्थिरता प्रदान करने वाली शक्ति” बताया।
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उन्होंने वैश्विक असुरक्षा, विस्तारवादी नीतियों, आर्थिक अस्थिरता, जलवायु चुनौतियों, जनसांख्यिकीय परिवर्तनों और नई तकनीकों — विशेषकर AI, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन — पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा को गंभीर चिंता का विषय बताया।
उन्होंने कहा, “हर तरफ हलचल और अनिश्चितता है। इसका समाधान यही है कि हम अपनी सभ्यतागत जड़ों की ओर लौटें।”