दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट को अंजाम देने वाले डॉक्टर उमर उन नबी के कट्टरपंथी व्यवहार के शुरुआती संकेत जम्मू-कश्मीर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) अनंतनाग में ही दिखने लगे थे। NDTV की रिपोर्ट में जांच एजेंसियों के सूत्रों का हवाला देते हुए यह खुलासा हुआ है।
महिला मरीजों से पूछते थे हिजाब और नमाज़ पर सवाल
पूर्व सहकर्मियों और मरीजों ने बताया कि नबी अक्सर उन महिलाओं की पहचान करते थे जिनका सिर ढका नहीं होता था।
वह उनसे पूछते थे:
- “आप हिजाब क्यों नहीं पहन रही हैं?”
- “आपका सिर ठीक से ढका क्यों नहीं है?”
- “आप दिन में कितनी बार नमाज़ पढ़ती हैं?”
कई लोगों ने इन सवालों को अव्यवसायिक और दखलअंदाज़ी वाला बताया।
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कट्टर धार्मिक सोच और शिकायतों के बाद सेवा समाप्त
जांच में यह भी सामने आया कि नबी:
- लड़के–लड़कियों के लिए अलग कक्षाओं की वकालत करते थे
- धार्मिक आचरण की कठोर व्याख्या करते थे
- मामूली असहमति को भी ‘विरोध’ मानते थे
मरीजों की शिकायतों के बाद GMC प्रशासन ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं।
फरीदाबाद में नौकरी और ‘कट्टर नेटवर्क’ से जुड़ाव
सेवा समाप्त होने के बाद नबी फरीदाबाद चले गए और अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बने।
सूत्रों के अनुसार, इसी दौरान वह उग्रवादी नेटवर्क के और करीब आते गए।
अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में नबी कई कट्टरपंथी ऑनलाइन ग्रुप्स से जुड़े थे, जिससे उनका तेज़ी से कट्टरपंथी परिवर्तन हुआ।
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दिल्ली में कार ब्लास्ट का निष्पादन
10 नवंबर को लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास खड़ी Hyundai i20 में IED विस्फोट हुआ, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई और कई जख्मी हुए।
ड्राइवर उमर नबी ही था, यह उसकी मां के डीएनए नमूनों से मिलान के बाद पुष्टि हुई।
14 नवंबर को सुरक्षा बलों ने उसके पुलवामा स्थित घर को ध्वस्त कर दिया।