भारत-चीन संबंधों में हालिया नरमी के बीच अमेरिका के एक संसदीय सलाहकारी आयोग ने आरोप लगाया है कि चीन ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत को निशाना बनाने के लिए एआई-आधारित दुष्प्रचार अभियान चलाया।
अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि चीन ने नकली सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए एआई-निर्मित तस्वीरें प्रसारित कीं, जिनमें भारतीय और फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों के “मलबे” को दिखाया गया—मानो उन्हें चीनी सैन्य प्रणालियों ने नष्ट किया हो।
रफाल की छवि कमजोर करने और J-35 को बढ़ावा देने का प्रयास
रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग का उद्देश्य भारतीय वायुसेना द्वारा संचालित फ्रांसीसी रफाल लड़ाकू विमान की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था, ताकि अपने नए J-35 विमान को बढ़ावा दिया जा सके।
इसे चीन की बड़ी “ग्रे ज़ोन रणनीति” का हिस्सा बताया गया, जिसका लक्ष्य बिना प्रत्यक्ष सैन्य टकराव के भू-राजनीतिक प्रभाव बनाना है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, मई में भारत-पाकिस्तान तनाव के समय चीन ने “अवसरवाद” दिखाते हुए अपने हथियारों की कथित क्षमता को बढ़-चढ़कर प्रस्तुत किया।
ऑपरेशन सिंदूर: पहलगाम हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई
अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने मई में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान के आतंकी ढांचे और सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाया गया।
अगस्त में वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने पुष्टि की कि भारत ने पाँच पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और एक बड़े एरबोर्न सर्विलांस विमान को नष्ट किया।
भारत-चीन विवादों में असमानता का उल्लेख
रिपोर्ट ने कहा कि सीमा विवादों के समाधान को लेकर भारत और चीन की सोच में मूलभूत असमानता है।
- चीन उच्चस्तरीय कूटनीति के जरिए सीमित समाधान चाहता है और सीमा मुद्दे को व्यापार-निवेश से अलग रखना चाहता है।
- भारत मानता है कि सीमा विवाद के वास्तविक समाधान के बिना रिश्तों का सामान्यीकरण संभव नहीं।
रिपोर्ट ने कहा कि हालिया समझौते “कथात्मक” हैं और उनमें ठोस कार्यान्वयन की कमी है।
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दलाई लामा के उत्तराधिकार पर संभावित तनाव
रिपोर्ट के अनुसार, दलाई लामा के भविष्य के उत्तराधिकार को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
भारत-अमेरिका और भारत-चीन समीकरण
रिपोर्ट ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया चीन यात्रा को अमेरिका में भारत की “रणनीतिक हेजिंग” के रूप में देखा गया, खासकर अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50% शुल्क लगाने के बाद।
इसके बावजूद, रिपोर्ट ने संकेत दिया कि भारत-अमेरिका संबंध अब स्थिरता की ओर बढ़ रहे हैं और जल्द ही नए व्यापार समझौते का पहला चरण घोषित हो सकता है।