पाकिस्तान की संसद ने एक संवैधानिक संशोधन पारित किया है, जिसके तहत सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को अतिरिक्त शक्तियाँ और आजीवन कानूनी छूट दी गई है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को भी सीमित किया गया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को नेशनल असेंबली ने दो-तिहाई बहुमत से इस बिल को मंजूरी दी। केवल चार सांसदों ने इसका विरोध किया। विपक्ष के बहिष्कार के बाद यह बिल रिकॉर्ड समय में पारित हो गया। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा।
सेना प्रमुख को मिलेगा ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस’ का पद
संशोधन के तहत जनरल आसिम मुनीर को नया पद ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस’ दिया जाएगा, जिससे वे सेना, नौसेना और वायुसेना — तीनों सेनाओं की कमान संभालेंगे। कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें आजीवन कानूनी छूट भी प्राप्त होगी।
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने इस संशोधन को “संस्थागत सामंजस्य और राष्ट्रीय एकता” की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
उन्होंने संसद में कहा, “आज हमने यह संशोधन सिर्फ एक फील्ड मार्शल के लिए नहीं किया है। देश अपने नायकों का सम्मान करना जानता है।”
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विपक्ष और विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों और संवैधानिक विशेषज्ञों ने इस संशोधन को न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला और सैन्य शक्ति का केंद्रीकरण बताया है।
इस संशोधन से सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक मामलों पर अधिकारिता समाप्त कर दी गई है। अब ये मामले नई गठित फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट में सुने जाएंगे, जिसके न्यायाधीश सरकार नियुक्त करेगी।
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सांसदों ने सदन से वाकआउट किया और बिल की प्रतियाँ फाड़ दीं। पीटीआई प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने कहा,
“किसी सांसद ने लोकतंत्र या न्यायपालिका की परवाह नहीं की। पाकिस्तान के संविधान को शांति मिले।”
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संवैधानिक विशेषज्ञों की चेतावनी
संवैधानिक वकील असद रहीम खान ने कहा कि यह कदम पाकिस्तान के न्यायिक ढांचे में “अभूतपूर्व संकट” पैदा करेगा।
वहीं मिर्ज़ा मोइज़ बैग ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए “मौत की घंटी” करार दिया।
उन्होंने कहा,
“इस संशोधन के साथ संसद ने वह कर दिखाया है जो अब तक तानाशाह भी नहीं कर पाए।”
सेना की भूमिका और मजबूत हुई
पाकिस्तान की राजनीति में सेना का प्रभाव पहले से ही गहरा रहा है, लेकिन यह संशोधन सेना को संवैधानिक रूप से वैध अधिकार प्रदान करता है, जिससे वह देश की सत्ता संरचना का स्थायी हिस्सा बन गई है।