लाल किला कार ब्लास्ट और उससे जुड़े फरीदाबाद मॉड्यूल की जांच ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है — शिक्षित और पेशेवर वर्ग के लोगों का बढ़ता कट्टरपंथी जुड़ाव।
जांच में सामने आया है कि कई डॉक्टर और उच्च शिक्षित पेशेवर अपने पेशे की आड़ में आतंकी नेटवर्क को फंड और सुविधा प्रदान कर रहे थे।
डॉ. शाहीन सईद: नेटवर्क की वित्तीय कुंजी
जांच के केंद्र में उत्तर प्रदेश की डॉक्टर शाहीन सईद हैं, जिनकी भूमिका फंडिंग और नेटवर्क को सहायता देने में बेहद अहम मानी जा रही है।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, शाहीन का संबंध डॉ. उमर मोहम्मद से था — पुलवामा का वही डॉक्टर, जो सोमवार को हुए लाल किला विस्फोट में शामिल बताया जा रहा है। दोनों ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज, फरीदाबाद से साथ पढ़ाई की थी।
इसके अलावा, शाहीन का करीबी संबंध डॉ. मुझम्मिल शकील से भी था, जिससे भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, शाहीन और मुझम्मिल के बीच व्यक्तिगत और ऑपरेशनल दोनों तरह का रिश्ता था, जिससे वह सीधे आतंकी साजिश के केंद्र में आ गईं।
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कट्टरपंथ और ‘महिला ब्रिगेड’ का संबंध
एजेंसियों का मानना है कि शाहीन सईद को जैश-ए-मोहम्मद (JeM) द्वारा चलाए गए एक अभियान के दौरान कट्टरपंथी बनाया गया। इस अभियान का मकसद भारत में महिला ब्रिगेड तैयार करना था, जो मानसिक युद्ध और प्रचार कार्यों में सक्रिय हो।
सूत्रों के अनुसार, शाहीन महिलाओं की भर्ती और प्रशिक्षण की निगरानी कर रही थीं और इस सिलसिले में उन्होंने कई बार जम्मू-कश्मीर की यात्राएं कीं। जांचकर्ताओं को शक है कि वह न केवल हमले की योजना से अवगत थीं, बल्कि फंडिंग में भी सीधा योगदान दिया।
फंडिंग ट्रेल और आर्थिक लिंक
जांच में पता चला है कि इस मॉड्यूल ने कुल ₹35–40 लाख की रकम जुटाई थी, जिसमें बड़ी राशि शाहीन के नेटवर्क से आई।
फरीदाबाद में हथियारों से भरी जिस कार को जब्त किया गया, वह शाहीन के नाम पर पंजीकृत थी। यह उनके गहरे संलिप्त होने का संकेत है।
शाहीन, उमर और मुझम्मिल के बीच एन्क्रिप्टेड संदेश मेडिकल वेलफेयर और एनजीओ प्लेटफॉर्म्स के जरिये भेजे गए, जो बाद में फंड ट्रांसफर और कोऑर्डिनेशन के आवरण साबित हुए।
इन पेशेवर चैनलों की वजह से नेटवर्क लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचा रहा।
एनसीआर में अल-फलाह नेटवर्क की जांच तेज
अब एजेंसियां शाहीन के अल-फलाह नेटवर्क से जुड़े संबंधों की जांच कर रही हैं, जिसे दिल्ली-एनसीआर में भर्ती और विचारधारा फैलाने का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
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यह नेटवर्क शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों की आड़ में कट्टरपंथी विचारधारा फैलाता था और कई शिक्षित युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करता था।
शिक्षित वर्ग में बढ़ती कट्टरता से खतरे का संकेत
जांच के दायरे के बढ़ने के साथ ही सुरक्षा एजेंसियों में यह चिंता गहराई है कि शिक्षित और पेशेवर वर्ग का कट्टरपंथी बनना देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
एक महिला डॉक्टर द्वारा आतंकी मॉड्यूल को फंडिंग और समर्थन देने की भूमिका ने एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है, जो भारत में आतंकवाद के बदलते चेहरे की ओर संकेत करता है।