सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चुनाव आयोग (ECI) द्वारा देशभर में की जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी। अदालत ने इस मामले की सुनवाई सोमवार, 11 नवंबर के लिए निर्धारित की है।
याचिकाओं में मताधिकार छिनने की आशंका जताई गई
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और कई राजनीतिक दलों की ओर से दायर याचिकाओं में दावा किया गया है कि यह व्यापक पुनरीक्षण प्रक्रिया लाखों वैध मतदाताओं को सूची से बाहर कर सकती है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन होगा और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों की प्रक्रिया प्रभावित होगी।
यह मामला पहले बिहार में हुए SIR से जुड़ा था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़कर 12 अन्य राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों — जैसे पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश — तक पहुंच गया है।
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‘लोकतंत्र की जड़ से जुड़ा मुद्दा’: प्रशांत भूषण ने त्वरित सुनवाई की मांग की
ADR की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह मामला “लोकतंत्र की जड़ से जुड़ा हुआ” है और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
उन्होंने दो मुख्य बिंदु अदालत के समक्ष रखे—
- मनमानी विलोपन: बिहार में मतदाता सूची से लगभग 47 लाख नाम बिना उचित प्रक्रिया के हटाए गए हैं, जो असंवैधानिक है।
- आधार विवाद: भूषण ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा आधार कार्ड को मान्य पहचान दस्तावेज़ न मानना, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों का उल्लंघन है।
DMK ने तमिलनाडु में SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तमिलनाडु में SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।
पार्टी का कहना है कि यह हाल ही में पूरी हुई सारांश पुनरीक्षण प्रक्रिया के तुरंत बाद किया जा रहा है, जो “संवैधानिक अतिक्रमण” है और इसे “डी फैक्टो एनआरसी” के रूप में देखा जा सकता है।
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चुनाव आयोग ने कहा – ‘मतदाता सूची शुद्धिकरण की प्रक्रिया’
चुनाव आयोग ने SIR को आवश्यक और पारदर्शी प्रक्रिया बताया, जिसका उद्देश्य मृत, डुप्लिकेट या अयोग्य मतदाताओं को सूची से हटाना है ताकि मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाया जा सके।
11 नवंबर को होगी अहम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की 11 नवंबर की सुनवाई यह तय करेगी कि क्या SIR प्रक्रिया संवैधानिक सुरक्षा और प्रत्येक नागरिक के मताधिकार को संरक्षित रखने की कसौटी पर खरी उतरती है या नहीं।