भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि आने वाले समय की सुरक्षा चुनौतियाँ अनिश्चितता, अस्थिरता, जटिलता और अस्पष्टता से भरी होंगी। उन्होंने भविष्य की परिस्थितियों की अप्रत्याशितता को समझाते हुए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उदाहरण दिया।
मध्य प्रदेश के रीवा स्थित टीआरएस कॉलेज में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सेना लगातार रूपांतरण और आधुनिकीकरण की दिशा में कार्य कर रही है ताकि हर चुनौती का सामना किया जा सके।
“ट्रंप को भी नहीं पता, वे कल क्या करेंगे”
जनरल द्विवेदी ने कहा,
“आप और मैं बिल्कुल नहीं जानते कि भविष्य में क्या होने वाला है। ट्रंप आज क्या कर रहे हैं? मुझे लगता है, उन्हें भी नहीं पता कि वे कल क्या करेंगे।”
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उन्होंने कहा कि युद्ध के स्वरूप तेजी से बदल रहे हैं — सीमाओं से लेकर आतंकवाद, साइबर, स्पेस, रासायनिक, जैविक और सूचना युद्ध तक खतरे बढ़ते जा रहे हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दिखा आत्मविश्वास
सेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर की सराहना करते हुए कहा कि इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों का आत्मविश्वास, समन्वय और संयम साफ झलकता है।
उन्होंने कहा, “यह ऑपरेशन केवल जीत का प्रतीक नहीं था बल्कि संप्रभुता, अखंडता और शांति की पुनर्स्थापना का प्रयास था।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिशन का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा था, जो उस प्रार्थना का प्रतीक है जो देश की हर बेटी, बहन और माँ अपने सैनिकों के लिए करती है।
फेक न्यूज़ और नागरिकों की सुरक्षा पर बल
जनरल द्विवेदी ने यह भी बताया कि अभियान के दौरान फेक न्यूज़ और गलत सूचनाएँ फैलाई जा रही थीं, लेकिन भारत ने यह सुनिश्चित किया कि निर्दोष नागरिकों को कोई नुकसान न पहुँचे।
22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए, जिसमें लगभग 100 आतंकियों का सफाया हुआ।
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ट्रंप के दावे पर भारत का जवाब
भारत-पाकिस्तान के बीच यह संघर्ष चार दिन तक चला और 10 मई को समाप्त हुआ।
जहाँ डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों में संघर्ष रोकने में भूमिका निभाई, वहीं भारत ने स्पष्ट किया कि कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं था।
भारत ने कहा कि उसने केवल सैन्य उद्देश्यों की पूर्ति के बाद ही अभियान समाप्त किया, जबकि पाकिस्तान ने ट्रंप को इसका श्रेय देते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया।