भारत के सामाजिक विकास इतिहास में एक नया अध्याय लिखते हुए केरल आज आधिकारिक रूप से चरम गरीबी से मुक्त राज्य घोषित किया जाएगा। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन आज केरल पिरवी दिवस के अवसर पर तिरुवनंतपुरम में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में यह घोषणा करेंगे।
गरीबी उन्मूलन में केरल की ऐतिहासिक छलांग
यह उपलब्धि 2021 में एलडीएफ सरकार द्वारा शुरू की गई चरम गरीबी उन्मूलन परियोजना (EPEP) का परिणाम है। यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-1 “गरीबी का अंत” के अनुरूप है और केरल को राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करती है।
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समुदाय आधारित और डेटा-आधारित सर्वेक्षण
इस घोषणा का आधार कुडुंबश्री महिला नेटवर्क द्वारा किए गए व्यापक सर्वेक्षण पर टिका है, जिसमें स्थानीय स्वशासन संस्थाओं, आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही।
सर्वेक्षण में 64,006 परिवारों की पहचान की गई, जो भोजन, आवास, आय और स्वास्थ्य जैसे चार प्रमुख मानकों पर गंभीर अभाव झेल रहे थे।
हर परिवार के लिए व्यक्तिगत पुनर्वास योजना
राज्य सरकार ने प्रत्येक परिवार के लिए एक सूक्ष्म पुनर्वास योजना बनाई, जिसमें विभिन्न राज्य और केंद्र योजनाओं को समेकित किया गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 10,944 से अधिक घरों का निर्माण या नवीनीकरण हुआ, 439 भूमिहीन परिवारों को भूमि दी गई, और हजारों लोगों को आजीविका, चिकित्सा सहायता तथा पहचान पत्र जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की गईं।
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विशेषज्ञों ने मांगी पारदर्शिता, सरकार ने किया बचाव
हालांकि इस उपलब्धि की व्यापक सराहना हो रही है, अर्थशास्त्रियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से पद्धति संबंधी विस्तृत रिपोर्ट जारी करने की मांग की है।
सरकार का कहना है कि सहभागी और सूक्ष्म स्तर पर आधारित यह पहल अपने लक्ष्यों को पूरी तरह हासिल कर चुकी है — जिससे केरल भारत के सामाजिक उत्थान के इतिहास में मील का पत्थर बन गया है।