केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बुधवार को न्यूज़18 सबसे बड़ा दंगल कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा, धार्मिक संगठनों और मतदाता सूची की पवित्रता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता “सुरक्षा” है, न कि सेक्युलरिज़्म का दिखावा। उनके बयान को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के राजनीतिक एजेंडे की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
“देश तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा”
शाह ने पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) पर सरकार की सख्त नीति दोहराई।
उन्होंने कहा, “क्या सिर्फ इसलिए कि कोई संगठन किसी धर्म के लोगों ने बनाया है, उसे देशविरोधी गतिविधियां करने की छूट मिलनी चाहिए? जो भी देश के खिलाफ काम करेगा, उस पर प्रतिबंध लगेगा।”
शाह ने विपक्ष पर सुरक्षा मुद्दों का साम्प्रदायिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि “देश की सुरक्षा को हिंदू-मुस्लिम चश्मे से नहीं देखा जा सकता।”
यह भी पढ़ें – भारत-यूरोपीय संघ व्यापार व निवेश सहयोग को मजबूत करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ईयू प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात
घुसपैठियों को मताधिकार नहीं – शाह
अवैध घुसपैठ पर बोलते हुए शाह ने इसे सीधे मतदाता सूची की शुद्धता से जोड़ा। उन्होंने कहा, “देश में घुसपैठियों को मतदान का अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल भारतीय नागरिकों का है।”
उन्होंने कहा कि गैर-नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल होना भारत के लोकतंत्र की आत्मा को दूषित करता है।
बिहार में एनडीए का चुनावी संदेश
यह भी पढ़ें – शेख हसीना ने कहा – “भारत में स्वतंत्र रूप से रह रही हूं, फिलहाल बांग्लादेश लौटने की कोई योजना नहीं”
शाह के बयान को बिहार चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ विरोधी नीति को प्रमुख मुद्दा बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने एक बार फिर “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” (पहचानो, हटाओ और देश से बाहर करो) नीति को दोहराया और विपक्ष पर घुसपैठियों की रक्षा कर वोट बैंक राजनीति करने का आरोप लगाया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शाह का यह संदेश बिहार में चुनावी बहस को “सुरक्षा बनाम सेक्युलरिज़्म” के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है।