केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को नई दिल्ली में यूरोपीय संसद की अंतरराष्ट्रीय व्यापार मामलों की समिति (INTA) के सदस्यों से मुलाकात की। बैठक का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आर्थिक सहयोग को और गहरा करना और व्यापार व निवेश संबंधों को सशक्त बनाना था।
व्यापार व निवेश संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा
वित्त मंत्रालय के अनुसार, बैठक में भारत-ईयू व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने तथा परस्पर लाभकारी साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया गया।
मंत्रालय ने X पर कहा, “दोनों पक्षों ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए गहन चर्चा की और संतुलित सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।”
INTA समिति यूरोपीय संघ की व्यापार नीतियों और बाहरी आर्थिक संबंधों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और ईयू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
यह भी पढ़ें – शेख हसीना ने कहा – “भारत में स्वतंत्र रूप से रह रही हूं, फिलहाल बांग्लादेश लौटने की कोई योजना नहीं”
एफटीए वार्ता में प्रगति
वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि स्टील, ऑटोमोबाइल, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और अन्य नियामकीय मुद्दों पर और चर्चा की आवश्यकता है, क्योंकि ये संवेदनशील विषय हैं।
दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 तक एफटीए को अंतिम रूप देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने फरवरी 2025 में अपने दौरे के दौरान निर्देश दिया था।
गैर-शुल्कीय अवरोधों और नई नीतियों पर चर्चा
यह भी पढ़ें – रूस ने किया पोसाइडन का सफल परीक्षण, परमाणु-संचालित पानी के भीतर का सुपरहथियार
बैठक में गैर-शुल्कीय अवरोधों, नई ईयू नीतियों, और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए भारत की प्राथमिक मांगों पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने गैर-संवेदनशील औद्योगिक शुल्क लाइनों को अंतिम रूप देने और शेष मुद्दों को सुलझाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में 26 से 28 अक्टूबर तक ब्रसेल्स में ईयू अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जो इस महीने हुई एफटीए वार्ता के 14वें दौर के तुरंत बाद हुई, जिससे समझौते की दिशा में गति बनी हुई है।