राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने मंगलवार को बिहार और पश्चिम बंगाल की वोटर सूचियों में उनका नाम दर्ज होने के विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह डुप्लिकेशन उनकी गलती नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की लापरवाही का परिणाम है।
किशोर ने कहा कि वह 2019 से बिहार के कारगहर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं। “जब मैं दो साल कोलकाता में था, तब वहां वोटर आईडी बनवाई थी। 2021 से मेरा वोटर आईडी कारगहर का है। अगर आयोग को लगता है कि मेरा नाम कहीं और भी है, तो उसे विशेष पुनरीक्षण के दौरान क्यों नहीं हटाया गया? अगर गलती मेरी है तो मुझे गिरफ़्तार करें,” उन्होंने एएनआई से कहा।
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चुनाव आयोग का नोटिस और कानूनी प्रावधान
बिहार विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने जन सुराज पार्टी प्रमुख को नोटिस जारी किया है। नोटिस के अनुसार, किशोर का नाम बिहार के रोहतास जिले के कारगहर विधानसभा क्षेत्र की भाग संख्या 367 और बूथ संख्या 621 में दर्ज है, जबकि एक और नाम कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 121, कालीघाट रोड (टीएमसी मुख्यालय) पर दर्ज बताया गया है।
चुनाव आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 17 और 18 का हवाला दिया है, जिसमें एक व्यक्ति को एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकरण करने से रोका गया है। निवास स्थान बदलने पर मतदाता को पुराने निर्वाचन क्षेत्र से नाम विलोपित करने के लिए फॉर्म 8 भरना अनिवार्य है।
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विशेष पुनरीक्षण में हटाए गए 68 लाख डुप्लिकेट नाम
यह विवाद उस समय सामने आया जब चुनाव आयोग ने 30 सितंबर 2025 को बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी की। इस प्रक्रिया के तहत 68.66 लाख डुप्लिकेट और अयोग्य नाम हटाए गए, जिनमें लगभग सात लाख मतदाताओं के दोहरे पंजीकरण शामिल थे।
आयोग ने स्वीकार किया कि मतदाता सूची में डुप्लिकेट नाम एक लगातार समस्या है और देशभर में ऐसे मामलों को सुधारने के लिए विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है।