राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली बुधवार सुबह एक बार फिर घने धुएं और जहरीली हवा की चपेट में रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, अक्षरधाम क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 360 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में आता है।
लगातार बढ़ रहा प्रदूषण स्तर
सुबह 6:15 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, अशोक विहार, बवाना और दिलशाद गार्डन जैसे क्षेत्रों में AQI 380 के आसपास पहुंच गया। वहीं आईजीआई एयरपोर्ट, डीटीयू और लोदी रोड जैसे इलाकों में प्रदूषण स्तर थोड़ा कम था, लेकिन फिर भी “खराब” श्रेणी में बना रहा।
विशेषज्ञों ने बताया कि पराली जलाने, वाहनों के धुएं, और स्थिर मौसम स्थितियों के कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है।
डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
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मुख्यमंत्री का बयान: ‘कृत्रिम वर्षा के लिए सक्रिय रूप से काम जारी’
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को कहा कि सरकार कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain) की योजना पर “सक्रिय रूप से काम” कर रही है, ताकि प्रदूषण स्तर को कम किया जा सके।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह पहल भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की अनुमति और बादल व नमी की पर्याप्त स्थिति मिलने के बाद लागू की जाएगी।
गुप्ता ने कहा, “सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक 10,000 इलेक्ट्रिक बसें तैनात करने का है।”
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है, जिससे बुनियादी ढांचा मजबूत हो और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाई जा सके।
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GRAP चरण-II के तहत जारी पाबंदियां
बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण को जारी रखने का निर्णय लिया है। यह चरण 19 अक्टूबर से लागू है।
इसके तहत कई सख्त उपाय लागू किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- प्रमुख सड़कों की दैनिक मैकेनिकल और वैक्यूम सफाई
- सड़कों पर धूल नियंत्रण के लिए पानी का छिड़काव
- निर्माण स्थलों पर निगरानी और धूल नियंत्रण नियमों का सख्त पालन
- पार्किंग शुल्क में वृद्धि और निजी वाहनों के उपयोग पर रोकथाम
- सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाना
- डीजल जेनरेटर के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध, आवश्यक सेवाओं को छोड़कर
सीएक्यूएम ने अपने बयान में कहा कि “भारी यातायात वाले इलाकों में हर दूसरे दिन पानी और धूल नियंत्रण पदार्थों का छिड़काव किया जाए और एकत्र धूल को निर्धारित स्थानों पर निपटाया जाए।”