कर्नाटक मंत्रिमंडल ने गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियों को सार्वजनिक स्थानों और सरकारी संस्थानों में नियंत्रित करने के लिए नियम बनाने का निर्णय लिया। यह कदम राज्य मंत्री प्रियंक खड़गे के उस पत्र के बाद आया है, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से इन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।
कैबिनेट बैठक के बाद खड़गे ने कहा कि सरकार किसी संगठन को नियंत्रित नहीं करना चाहती, लेकिन अब से किसी भी सार्वजनिक स्थान या सड़क पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। उन्होंने कहा, “अब कोई भी सड़क पर लाठी लेकर मार्च या ‘पथ संचलन’ बिना सरकारी अनुमति के नहीं कर सकेगा। ये सभी बातें नए नियमों में शामिल होंगी।”
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उन्होंने बताया कि ये नियम सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, परिसरों और सहायता प्राप्त संस्थानों पर भी लागू होंगे। गृह, विधि और शिक्षा विभागों द्वारा पहले जारी आदेशों को मिलाकर सरकार दो से तीन दिनों में नए नियम लागू करेगी, जो संविधान के दायरे में होंगे।
इस निर्णय के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने प्रियंक खड़गे पर निशाना साधते हुए उनके पिता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 2002 में आरएसएस के एक कार्यक्रम में मौजूदगी की तस्वीर साझा की।
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प्रियंक खड़गे ने अपने पत्र में आरोप लगाया था कि आरएसएस सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक मैदानों में शाखाएं आयोजित कर युवाओं के मन में विभाजनकारी विचार भरता है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन भेदभावपूर्ण भर्ती अभियान चलाता है और लाठी लेकर आक्रामक प्रदर्शन करता है, जिससे बच्चों और युवाओं के मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।