हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पुरन कुमार ने चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित अपने आवास में आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार, मौके से बरामद आठ पन्नों के एक नोट में उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों पर “मानसिक उत्पीड़न” और करियर को नुकसान पहुंचाने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
पुलिस ने बताया कि कुमार ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मारी। उनका शव बेसमेंट में उनकी बेटी ने पाया।
सूत्रों के मुताबिक, कुमार पिछले कुछ दिनों से तनाव में थे, क्योंकि उनका नाम एक रिश्वतखोरी मामले में सामने आया था। यह मामला एक शराब ठेकेदार की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसे राज्य सरकार की अनुमति के बिना दायर किया गया बताया जा रहा है।
रोहतक पुलिस ने इस सप्ताह की शुरुआत में एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि कुमार के सहयोगी सुशील कुमार ने उनके नाम पर ₹2.5 लाख की रिश्वत मांगी थी। सुशील कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एफआईआर में कुमार का नाम भी दर्ज है, जिसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
2001 बैच के आईपीएस अधिकारी वाई पुरन कुमार को हाल ही में 29 सितंबर को पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज, सुनारिया (रोहतक) में स्थानांतरित किया गया था। इससे पहले वे रोहतक रेंज के आईजी के रूप में कार्यरत थे। 19 मई 1973 को जन्मे कुमार इंजीनियरिंग स्नातक थे और 2033 में सेवानिवृत्त होने वाले थे।
अपने सुसाइड नोट में उन्होंने दस वरिष्ठ अधिकारियों — जिनमें कुछ सेवारत और कुछ सेवानिवृत्त हैं — पर लगातार मानसिक उत्पीड़न और करियर बर्बाद करने की साजिश का आरोप लगाया। सूत्रों के अनुसार, ये आरोप रोहतक में चल रही एक भ्रष्टाचार जांच से जुड़े हो सकते हैं, जिसकी निगरानी कुमार कर रहे थे।
कुमार ने इससे पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर हाल ही में हुई आईपीएस पदोन्नतियों की वैधता पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये पदोन्नतियां गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के विपरीत और केवल वित्त विभाग की मंजूरी से की गई थीं।
चंडीगढ़ पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की सत्यता की पुष्टि की जा रही है।