अक्सर संपत्ति बेचने के बाद यह सवाल उठता है कि दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (Long-Term Capital Gains) पर कर से कैसे बचा जाए। एक आम स्थिति यह होती है — अगर किसी ने दो अलग-अलग आवासीय मंज़िलें बेची हैं, तो क्या उन दोनों की पूंजीगत आय को जोड़कर एक ही नया मकान खरीदा जा सकता है और फिर भी आयकर अधिनियम की धारा 54 के तहत छूट मिल सकती है?
मामले की पृष्ठभूमि
एक करदाता ने स्टिल्ट + चार मंज़िला इमारत बनाई और बाद में दो मंज़िलें अलग-अलग खरीदारों को बेच दीं।
दोनों बिक्री से प्राप्त धनराशि कैपिटल गेन खाते में जमा की गई। अब सवाल यह था कि क्या इन दोनों खातों की रकम को एक नए मकान की खरीद में मिलाकर उपयोग किया जा सकता है?
कानून क्या कहता है
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) अपनी आवासीय संपत्ति बेचता है और उस राशि को भारत में दूसरी आवासीय संपत्ति में निवेश करता है, तो उसे दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर से छूट मिल सकती है।
⏱️ समय सीमा:
- नया मकान बिक्री से 1 वर्ष पहले या 2 वर्ष बाद खरीदा जा सकता है।
- यदि मकान निर्माणाधीन है, तो 3 वर्ष का समय मिलता है।
साथ ही, एक विशेष प्रावधान यह भी है कि एक संपत्ति की बिक्री से प्राप्त ₹2 करोड़ तक के लाभ को दो मकानों में निवेश किया जा सकता है — लेकिन यह जीवन में केवल एक बार ही लागू होता है।
विशेषज्ञों की राय
कर विशेषज्ञों का कहना है कि धारा 54 यह नहीं कहती कि दो संपत्तियों की पूंजीगत आय को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता।
जब तक दोनों बेची गई संपत्तियाँ आवासीय हैं और समय सीमा का पालन किया गया है, करदाता को छूट मिल सकती है।
मनीकंट्रोल की ‘Ask Wallet Wise’ रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि दोनों मंज़िलें आवासीय संपत्तियाँ थीं और पूंजीगत लाभ खाते में धन जमा किया गया था, इसलिए करदाता दोनों खातों की राशि को जोड़कर एक नया मकान खरीद सकता है और पूरी छूट का लाभ उठा सकता है।
निष्कर्ष
हाँ, दो अलग-अलग आवासीय मंज़िलों की बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ को मिलाकर एक ही नया मकान खरीदा जा सकता है, बशर्ते कि:
- बेची गई संपत्तियाँ आवासीय हों,
- निवेश निर्धारित समय सीमा में किया गया हो, और
- नया मकान भारत में खरीदा या निर्मित किया जाए।