मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को घोषणा की कि बिहार विधानसभा चुनाव 22 नवंबर से पहले कराए जाएंगे, क्योंकि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल उसी दिन समाप्त हो रहा है।
पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटों पर तैयारी शुरू हो चुकी है, जिनमें 2 अनुसूचित जनजाति (ST) और 38 अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।
चुनाव आयोग ने हाल ही में राज्य का दो दिवसीय समीक्षा दौरा पूरा किया और पहली बार बूथ स्तर के अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया है, ताकि चुनाव की तैयारियां अधिक मजबूत हों।
बिहार चुनाव के लिए 17 नई पहलें लागू
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि आयोग ने 17 नई सुधारात्मक पहलें (Reforms) लागू की हैं, जिनका उद्देश्य चुनाव को पारदर्शी और सुचारू बनाना है।
“17 नई पहलें बिहार में सफलतापूर्वक लागू की गई हैं — कुछ मतदान प्रक्रिया में और कुछ मतगणना के दौरान लागू होंगी,” उन्होंने कहा।
अब ईवीएम पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें
पहली बार, ईवीएम की बैलेट पेपर शीट पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें लगाई जाएंगी। अब तक केवल ब्लैक एंड व्हाइट फोटो दी जाती थी, जिससे पहचान में कठिनाई होती थी।
“पहले काले-सफेद फोटो होने से पहचान में मुश्किल होती थी। अब बिहार से शुरू होकर पूरे देश में रंगीन फोटो और बड़े सीरियल नंबर वाले बैलेट पेपर इस्तेमाल किए जाएंगे,” कुमार ने बताया।
सभी मतदान केंद्रों पर 100% वेबकास्टिंग
चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने के लिए इस बार सभी मतदान केंद्रों पर 100% वेबकास्टिंग की जाएगी।
वोटर लिस्ट से 3.66 लाख अपात्र नाम हटाए गए
ज्ञानेश कुमार ने बताया कि वोटर लिस्ट की गहन जांच की गई है, जिसमें 3.66 लाख अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
“पहले लगभग 65 लाख नाम हटाए गए थे और अब 3.66 लाख और नाम हटाए गए हैं। यदि किसी को आपत्ति है तो वह जिला अधिकारी के पास अपील कर सकता है,” उन्होंने कहा।
संशोधित मतदाता सूची की कॉपी सभी राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों को दी गई है।
एनडीए बनाम महागठबंधन: बिहार में बड़ा चुनावी मुकाबला
2025 का बिहार विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की एनडीए सरकार और राजद (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला साबित होने जा रहा है।
नई चुनावी व्यवस्थाओं, डिजिटल निगरानी और साफ की गई मतदाता सूची के साथ, यह चुनाव बिहार की राजनीति के इतिहास में सबसे पारदर्शी और अहम चुनावों में से एक माना जा रहा है।